Beet Gaye Din Par Din Beet Gaye

Raj Kamal

बीत गए दिन पर दिन बीत गए (2)

मधुर-मधुर सुरभि भारी
तेरी सरस स्वप्न तारि
इस तट से उस तट तक
पनघाट से पनघाट तक
मधुके घट भरे
भरे मधुके घट बीट गए
दिन पर दिन बीत गए... (1)

नीति प्रीति संघर्षण
दया नहीं आकर्षण
तरस बरस आशा में
नयनों की भाषा में
तन मन हम हार गए
तन मन पर जीत गए
दिन पर दिन बीत गए... (2)

Lyrics Submitted by Prashant Singh

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