damnlyrics.com

Babasaheb Bhimrao Ambedkar (Jeevan Geet)

बाबासाहब भीमराव अम्बेडकर

जीवन गीत

-----------------------

धरती के ऐसे लाल हैं

दुनिया में जो बेमिसाल हैं

बाबासाहब अम्बेडकर

बाबासाहब अम्बेडकर

सन् अट्ठारह सौ इक्यानवे

महीना चौथा, दिन चौदहवां

एम पी के महू शहर में

अनमोल रतन ने जनम लिया

जन्मा महार जाति में वो

माँ भीमा थी और पिता राम

सब दंग थे उसकी बुद्धि से

ऐसे थे उस बालक के काम

बाबासाहब अम्बेडकर

बाबासाहब अम्बेडकर

सदी बीसवीं थी आ पहुंची

दलित होना फिर भी अभिशाप था

उनका स्पर्श औरों के लिए

मानो कोई भीषण पाप था

चाहे जितनी पाँव में बेड़ीं थी

जितना घनघोर अँधेरा था

हर मोड़ पे दुनिया रोके थी

और घोर भेद-भाव ने घेरा था

इस पर भी बालक भीमराव

हार मानना नहीं सीखा

मुंबई एलफिंस्टन कॉलेज से

वो पहुँच गया फिर अमरीका

कोलम्बिया यूनिवर्सिटी में

अपनी ज्ञान पताका लहराई

फिर लंदन जा कर डॉक्टरेट की

और बैरिस्टर की पदवी पाई

वापस देश भीमराव जब लौटे

और ऊंचे पद को अपनाया

पर समाज में भेदभाव ने

उन्हें फिर भी अछूत ही ठहराया

देर लगी ना बाबासाहब को

इस रोग की जड़ तक पहुँच गए

और जंग छेड़ दी अधिकारों की

कर डाले संकल्प नए

कमज़ोरों की आवाज़ उठाई

सामाजिक न्याय का शंख बजाया

शिक्षा, संघर्ष और संगठन का

दलितों को अद्भुत मंत्र पढ़ाया

विद्यालय महाविद्यालय खोले

छात्रावासों की नींव धरी

ज्ञान प्रसार उत्थान की खातिर

कईं पत्रिकाएं शुरू करीं

और कई युद्ध बाकी थे

हर कदम पे ज़ुल्मों-सितम थे कई

हर तरफ से दमन और शोषण की

आती थी कहानी नयी नयी

फिर महाड वो पहुँच गये

और सत्याग्रह उदघोष जगाया

दलित जो जल ना छू सकते थे

उन्हें जल-प्रयोग का हक़ दिलवाया

दलितों के हक़ की लड़ाई में

नासिक फिर अगला पड़ाव था

उनके लिए मंदिर-द्वार थे बंद

ऐसा भीषण दुर्भाव था

पर भीमराव के तेज के आगे

कोई विरोध ना टिक पाया

ऊंच नीच दीवारें तोड़

हर पूजास्थल को खुलवाया

ये समय था आगे बढ़ने का

अधिकार बराबर पाने का

जिनकी आवाज़ थी कुचली गयी

सम्मान उन्हें दिलवाने का

तो भीमराव लंदन पहुंचे

और आँखें दुनिया की खोली

अलग पहचान की मांग धरी

अंग्रेज़ों ने भी हाँ बोली

फिर बाबासाहब और गांधी जी ने

साथ बैठ समझौता किया

दलितों के ख़ास अधिकारों को

कानून में पूरा दर्जा दिया

फिर आई घड़ी आज़ादी की

और नये राष्ट्र ने जनम लिया

बाबासाहब ने एक डोर में

बंधे सभी... वो जतन किया

बाबासाहब और नेहरू जी की

दृष्टि सब साकार हुई

संविधान वो दिया देश को

जग में जय जयकार हुई

कॉंग्रेस सरकार बनी और

पहला मंत्रिमंडल आया

संविधान-निर्माता भीम को

कानून-मंत्री भारत का बनाया I

इस धरती के हर कोने में

न्याय - समानता का अधिकार

महिलाओं और कमज़ोरों को मिले

यही थी उनकी पुकार !

उनके जीवन ने करवट ली

वो लगे खोजने मार्ग नये

वो धर्म से इतना विचलित थे

कि बुद्ध शरण में चले गए

बुद्धम शरणम... शरणम शरणम !

इस देश के सपनों की खातिर

जीवन में सब कुछ त्याग दिया

अपने सुख दुःख की ना चिंता की

फिर काल ने उनको घेर लिया

6 दिसंबर सन् छप्पन को

वो महाप्रयाण पे कह निकले

मानवता शोक में डूब गयी

हर आँख से आंसू बह निकले

धरती का सबसे प्रबुद्ध लाल

क्रान्ति की ज्वाला जला गया

समता, स्वतंत्रता, न्याय, बन्धुता

दुनिया को दे.. चला गया !

बाबासाहब तुम यहां नहीं

पर याद तुम्हारी कहाँ नहीं

तुम हर धड़कन में जीते हो

कोई दिल न ऐसा जहां नहीं

हर गाँव शहर चौबारे में

तुम अधिकारों के नारे में

जहां हमें ना राह दिखे

तुम दिख्खोगे ध्रुव-तारे में !!

बाबासाहब अम्बेडकर !

बाबासाहब अम्बेडकर !

-------------------

Written By: राजेश चेटवाल

Enjoy the lyrics !!!